राजस्थान में पर्यटन उद्योग

पर्यटन उद्योग
- ट्रेवल्स इन वेर्स्टन इण्डिया नामक पुस्तक में राजस्थान की भौगोलिक, सांस्कृतिक विषेषताओं का चित्रण हैं। यह टॉड द्वारा लिखी गई हैं।
- इण्डिन एन्टीक्यूरी:- टेसी टोरी की।
- राजस्थान भारत का पहला राज्य जिसने पर्यटन पुलिस का गठन किया।
- सन् 1989 में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया।
Rajasthan Tourism Development Corporation (RTDC) :-
यह सन् 1978 में गठित किया गया था।
कार्य:- पर्यटन विकास के लिए प्रोजेक्ट तैयार करना तथा पर्यटकों के लिए निवास, भोजन की व्यवस्था करना।
पर्यटको के लिए मनोरंजन, परिवहन तथा सुरक्षा की व्यवस्था करना।
-    सन् 1995 में जयपुर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का पर्यटन मेला आयोजित किया गया था। जिसका नामइनवेस्टररखा गया।
-    इस मेले में सिंगापुर को राजस्थान का सहभागी देष घोषित किया तथा केरल को मुख्य अतिथि बनाया।
स्वर्णिम त्रिकोण:-
दिल्लीआगराजयपुर
- मरू त्रिकोण:-
जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर अब इसमें सन् 2006 में शेखावटी और बीकानेर भी शामिल हो गए हैं।
-  विलेज ऑन व्हीलस
-  होटल का वर्गीकरण (हेरीटेज होटल):-
>    वे इमारते जो सन् 1950 से पहले बनी हैं या जो 75 वर्षं पुरानी हैं या 1935 से पहले की हैं।
-  हेरीटेज होटल:-
>    जिनमें कम से कम 5 कमरे हो 10 बिस्तर हो।
>    जो 1950 से पहले बने हों।
-    हेरिटेज क्लासिक होटल:-
>    जिसमें 15 कमरे हो 30 बिस्तर हों।
>    जो 1935 से पहले बने हों।
-   हेरिटेज ग्रांड होटल:-
>    जिसमें 15 कमरे 30 बिस्तर हों
>    वातानूकूलित हो, क्षेत्रीय भोजन मिलता हों।
>    तरणताल, हैल्थ क्लब, टेनिस हॉल, घुड़सवारी का मैदान, गोल्फ का मैदान हों।
>   75 वर्ष पुरानी हों।
राजस्थान के पर्यटन सर्किट
मरू सर्किट:- बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर, बाड़मेर।
शेखावटी सर्किट:- चुरू, झुन्झनु, सीकर
ढूढ़ांर सर्किट:- जयपुर, आमेर, सामोद (जयपुर), रामगढ़, दौसा, आभानेरी (दौसा)
हाड़ौति सर्किट:- कोटा, बूंदी, झालावाड़
वाड़ सर्किट:- अजमेर, पुष्कर, मेड़ता, नागौर
मेवाड़ सर्किट:- उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमन्द, नाथद्वारा, कुम्भलगढ़, डूंगरपुर, जयसमन्द।
रणकपुर सर्किट:- माऊण्ट आबू, जालौर, रणकपुर
बागड़ सर्किट:- डूंगरपुर, बांसवाड़ा।
मेवात सर्किट:- अलवर, भरतपुर, सवांईमाधोपुर, रणथम्भौर, टोंक
सन् 2006 से पहले 9 सर्किट थे।
वर्तमान में 10 सर्किट हैं, दसवां सर्किट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सर्किट हैं, जिसमें:- अलवर, सीलीसेढ़, सरिस्का, डीग, धौलपुर (बसेड़ी) आदि आते हैं।
पैलेस ऑन व्हील्स:-
राजस्थान पर्यटन विभाग और भारतीय रेलवे के द्वारा सन् 1982 में पहली बार राजस्थान के लिए शाही सुख-सुविधा वाली रेल चलायी।
शीतकाल में यह ट्रेन कुछ समय के लिए केरल को किराए पर दी जाती हैं।
सन् 2004 में इसका नाम रॉयल ऑरियन्टल एक्सप्रेस रखा गया हैं।
विलेज ऑन व्हील्स:-
देषी पर्यटकों को आकर्षिंत करने के लिए सन् 2004 में शुरू की गई।
जयपुर के जल महलों के रख-रखाव पर्यटकों को आकर्षिंत करने के लिए जलमहल योजना शुरू की गई।
सन् 1991 में पेइंग गेस्ट योजना शुरू की गई। जिसके अंतर्गत पर्यटक को घरेलू वातावरण उपलब्ध कराना, स्थानीय संस्कृति, रहन-सहन, खान-पान से परिचित करवाना आदि कार्य किये जाते हैं।
-  ग्रामीण पर्यटन योजना:-
इसके अन्तर्गत सैलानियों को ग्रामीण क्षेत्र में आकर्षिंत करने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर सुख-सुविधाएँ उपलब्ध करवाकर स्थानीय संस्कृति से परिचित करवाना।
मोहम्मद युनस समिति की सिफारिष पर पर्यटन को सन् 1989 में उद्योग का दर्जा दिया गया।
ऐसा करने वाला राजस्थान भारत का पहला राज्य था।
सांस्कृतिक धरोहन सेवा वाहिनी:-
विद्यार्थिंयों को राजस्थान की संस्कृति से अवगत करावाने के लिए ऐसी योजना शुरू करने वाला राजस्थान भारत का पहला राज्य हैं।
-  हेरीटेन ऑन व्हील्स:-
>यह सन् 2006 में जयपुर, बीकानेर, नवलगढ़, छापर के बीच में चलाई गई। यह सप्ताह में तीन दिन चलती हैं।
सन् 2001 में पर्यटन विभाग ने एक कलैण्डर जारी किया, जिसमें निम्नलिखित मेले त्यौहारों को शामिल किया गया:-
ग्रीष्मकालीन महोत्सव:- माऊन्ट आबू
तीज महोत्सव:- जयपुर
माराड़ महोत्सव:- जोधपुर
पुष्कर मेला:- अजमेर
चन्द्रभागा पशु मेला (कार्तिक):- झालावाड़ (हाड़ौती का प्रसिद्ध मेला)
ऊँट महोत्सव:- बीकानेर
मरू महोत्सव:- जैसलमेर
थार महोत्सव:- बाड़मेर
हाथी महोत्सव:- जयपुर
मेवाड़ महोत्सव:- उदयपुर
गणगौर महोत्सव:- जयपुर
राजस्थान के प्रमुख महल निम्नलिखित हैं:-
जूना पैलेस:- डूंगरपुर
जग मन्दिर पैलेस:- कोटा
मीरा का महल:- चित्तौड़गढ़
चन्द्रमहल:- जयपुर
लाल किला:- धौलपुर अलवर
बादल महल:- जैसलमेर
जवाहर विलास महल:- जैसलमेर
उम्मेद भवन पैलेस:- जोधपुर (छितर पैलेस)
अजीत भवन:- जोधुपर (उम्मेद पैलेस में)
लोहागढ़:- भरतपुर
तारागढ़ किला:- अजमेर
तारागढ़ महल:- बूंदी
पोकरण की हवेलियां:- जोधपुर में
नागौर पैलेस:- नागौर

राजस्थान में पर्यटन उद्योग

पर्यटन उद्योग
- ट्रेवल्स इन वेर्स्टन इण्डिया नामक पुस्तक में राजस्थान की भौगोलिक, सांस्कृतिक विषेषताओं का चित्रण हैं। यह टॉड द्वारा लिखी गई हैं।
- इण्डिन एन्टीक्यूरी:- टेसी टोरी की।
- राजस्थान भारत का पहला राज्य जिसने पर्यटन पुलिस का गठन किया।
- सन् 1989 में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया।
Rajasthan Tourism Development Corporation (RTDC) :-
यह सन् 1978 में गठित किया गया था।
कार्य:- पर्यटन विकास के लिए प्रोजेक्ट तैयार करना तथा पर्यटकों के लिए निवास, भोजन की व्यवस्था करना।
पर्यटको के लिए मनोरंजन, परिवहन तथा सुरक्षा की व्यवस्था करना।
-    सन् 1995 में जयपुर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का पर्यटन मेला आयोजित किया गया था। जिसका नामइनवेस्टररखा गया।
-    इस मेले में सिंगापुर को राजस्थान का सहभागी देष घोषित किया तथा केरल को मुख्य अतिथि बनाया।
स्वर्णिम त्रिकोण:-
दिल्लीआगराजयपुर
- मरू त्रिकोण:-
जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर अब इसमें सन् 2006 में शेखावटी और बीकानेर भी शामिल हो गए हैं।
-  विलेज ऑन व्हीलस
-  होटल का वर्गीकरण (हेरीटेज होटल):-
>    वे इमारते जो सन् 1950 से पहले बनी हैं या जो 75 वर्षं पुरानी हैं या 1935 से पहले की हैं।
-  हेरीटेज होटल:-
>    जिनमें कम से कम 5 कमरे हो 10 बिस्तर हो।
>    जो 1950 से पहले बने हों।
-    हेरिटेज क्लासिक होटल:-
>    जिसमें 15 कमरे हो 30 बिस्तर हों।
>    जो 1935 से पहले बने हों।
-   हेरिटेज ग्रांड होटल:-
>    जिसमें 15 कमरे 30 बिस्तर हों
>    वातानूकूलित हो, क्षेत्रीय भोजन मिलता हों।
>    तरणताल, हैल्थ क्लब, टेनिस हॉल, घुड़सवारी का मैदान, गोल्फ का मैदान हों।
>   75 वर्ष पुरानी हों।
राजस्थान के पर्यटन सर्किट
मरू सर्किट:- बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर, बाड़मेर।
शेखावटी सर्किट:- चुरू, झुन्झनु, सीकर
ढूढ़ांर सर्किट:- जयपुर, आमेर, सामोद (जयपुर), रामगढ़, दौसा, आभानेरी (दौसा)
हाड़ौति सर्किट:- कोटा, बूंदी, झालावाड़
वाड़ सर्किट:- अजमेर, पुष्कर, मेड़ता, नागौर
मेवाड़ सर्किट:- उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमन्द, नाथद्वारा, कुम्भलगढ़, डूंगरपुर, जयसमन्द।
रणकपुर सर्किट:- माऊण्ट आबू, जालौर, रणकपुर
बागड़ सर्किट:- डूंगरपुर, बांसवाड़ा।
मेवात सर्किट:- अलवर, भरतपुर, सवांईमाधोपुर, रणथम्भौर, टोंक
सन् 2006 से पहले 9 सर्किट थे।
वर्तमान में 10 सर्किट हैं, दसवां सर्किट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सर्किट हैं, जिसमें:- अलवर, सीलीसेढ़, सरिस्का, डीग, धौलपुर (बसेड़ी) आदि आते हैं।
पैलेस ऑन व्हील्स:-
राजस्थान पर्यटन विभाग और भारतीय रेलवे के द्वारा सन् 1982 में पहली बार राजस्थान के लिए शाही सुख-सुविधा वाली रेल चलायी।
शीतकाल में यह ट्रेन कुछ समय के लिए केरल को किराए पर दी जाती हैं।
सन् 2004 में इसका नाम रॉयल ऑरियन्टल एक्सप्रेस रखा गया हैं।
विलेज ऑन व्हील्स:-
देषी पर्यटकों को आकर्षिंत करने के लिए सन् 2004 में शुरू की गई।
जयपुर के जल महलों के रख-रखाव पर्यटकों को आकर्षिंत करने के लिए जलमहल योजना शुरू की गई।
सन् 1991 में पेइंग गेस्ट योजना शुरू की गई। जिसके अंतर्गत पर्यटक को घरेलू वातावरण उपलब्ध कराना, स्थानीय संस्कृति, रहन-सहन, खान-पान से परिचित करवाना आदि कार्य किये जाते हैं।
-  ग्रामीण पर्यटन योजना:-
इसके अन्तर्गत सैलानियों को ग्रामीण क्षेत्र में आकर्षिंत करने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर सुख-सुविधाएँ उपलब्ध करवाकर स्थानीय संस्कृति से परिचित करवाना।
मोहम्मद युनस समिति की सिफारिष पर पर्यटन को सन् 1989 में उद्योग का दर्जा दिया गया।
ऐसा करने वाला राजस्थान भारत का पहला राज्य था।
सांस्कृतिक धरोहन सेवा वाहिनी:-
विद्यार्थिंयों को राजस्थान की संस्कृति से अवगत करावाने के लिए ऐसी योजना शुरू करने वाला राजस्थान भारत का पहला राज्य हैं।
-  हेरीटेन ऑन व्हील्स:-
>यह सन् 2006 में जयपुर, बीकानेर, नवलगढ़, छापर के बीच में चलाई गई। यह सप्ताह में तीन दिन चलती हैं।
सन् 2001 में पर्यटन विभाग ने एक कलैण्डर जारी किया, जिसमें निम्नलिखित मेले त्यौहारों को शामिल किया गया:-
ग्रीष्मकालीन महोत्सव:- माऊन्ट आबू
तीज महोत्सव:- जयपुर
माराड़ महोत्सव:- जोधपुर
पुष्कर मेला:- अजमेर
चन्द्रभागा पशु मेला (कार्तिक):- झालावाड़ (हाड़ौती का प्रसिद्ध मेला)
ऊँट महोत्सव:- बीकानेर
मरू महोत्सव:- जैसलमेर
थार महोत्सव:- बाड़मेर
हाथी महोत्सव:- जयपुर
मेवाड़ महोत्सव:- उदयपुर
गणगौर महोत्सव:- जयपुर
राजस्थान के प्रमुख महल निम्नलिखित हैं:-
जूना पैलेस:- डूंगरपुर
जग मन्दिर पैलेस:- कोटा
मीरा का महल:- चित्तौड़गढ़
चन्द्रमहल:- जयपुर
लाल किला:- धौलपुर अलवर
बादल महल:- जैसलमेर
जवाहर विलास महल:- जैसलमेर
उम्मेद भवन पैलेस:- जोधपुर (छितर पैलेस)
अजीत भवन:- जोधुपर (उम्मेद पैलेस में)
लोहागढ़:- भरतपुर
तारागढ़ किला:- अजमेर
तारागढ़ महल:- बूंदी
पोकरण की हवेलियां:- जोधपुर में
नागौर पैलेस:- नागौर